घरों में श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

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शनिवार को परशुराम जयंती मनाई गई। लॉकडाउन के कारण श्रद्धालुओं ने घरों में ही पूजन किया और परशुराम की आरती और चालीसा का पाठ किया।
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष मुनीश चंद्र शर्मा के आवास पर भगवान विष्णु के छठे अवतार ब्राह्मण कुल शिरोमणि एवं भगवान शंकर के अनन्य उपासक भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम भगवान के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया, तत्पश्चात भगवान परशुराम चालीसा का पाठ किया गया। इस अवसर पर मुनीश चंद्र शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम हर ब्राह्मण के रोम-रोम में बसे हैं। शास्त्र और शस्त्र पर उनका समान अधिकार था। भगवान परशुराम का जीवन केवल ब्राह्मणों के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण समाज के लिए अनुकरणीय है। चाहे उनका अपने पिता के प्रति समर्पण हो या फिर माता के प्रति उनका प्रेम दोनों ही अतुल्य है। भगवान परशुराम ने त्रेतायुग में भगवान राम को दिव्य धनुष और द्वापर में भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया, ताकि शत्रुओं का विनाश कर सकें। भगवान चिरंजीवी हैं और कलियुग में महेंद्र पर्वत पर निवास करते हैं। उन्होंने ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर भी क्षत्रियों की भांति इस पृथ्वी को अत्याचारी और दुराचारियों से मुक्त कराया। इसके बाद भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष 51 दीप प्रज्ज्वलित किए गए तथा जनमानस के कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। इस अवसर पर सुधा शर्मा, अम्बर वशिष्ठ, व्योम वशिष्ठ, सौरभ पाठक, दीपक शर्मा ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही शाम के वक्त श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर घरों के दरवाजे पर रखे। मंदिरों में पुजारियों और अन्य स्थानों पर भी श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम के प्रकोटत्सव पर पूजन किया।

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