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कोरोना महामारी ने स्कूली बच्चों के दिल और दिमाग पर दो साल तक गहरा असर डाला है। बच्चों की इस मनोदशा को बदलना अभिभावकों से लेकर शिक्षकों तक के लिए बेहद चुनौती बन रहा है। इससे उबारने के लिए यहां कई स्कूलों ने योग और खेल गतिविधियां को बढ़ावा दिया है।

स्कूलों में अब काउंसिलिंग पर जोर दिया गया है। ऑनलाइन पढ़ाई के चलते पूरी तरह बेफिक्र हुए बच्चों में ऑफलाइन कक्षाओं में उत्साह तो देखने को मिला लेकिन पढ़ाई के नाम पर उनके चेहरे की रंगत फीकी नजर आई। अधिकतर बच्चे अभी भी अपना ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।

उन पर शिक्षकों को अधिक ध्यान देना पड़ रहा है। कई स्कूलों में शिक्षक छात्रों की अतिरिक्त कक्षा चलाकर उनकी मनोदशा को पढ़कर पढ़ाई कराई जा रही है। खेल के साथ ही मनोरंजन के तरीकों से उनकी मनोदशा को एकाग्र करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

चंपावत: बच्चों की दिनचर्या में आया बदलाव
कोरोना महामारी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मन:स्थिति को बदल दिया है। स्कूल बंद होने से लेकर खेल गतिविधियों पर लगी रोक के कारण घर से बाहर कम निकलने से बच्चों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। इन बदलाव ने बच्चों की शारीरिक और मानसिक हालत को झकझोरा है। 

घर में हम उम्र का साथ न मिलने से अकेलेपन ने कुछ जगह अवसाद की स्थिति पैदा कर दी। ऐसे में जिले के उदयन इंटरनेशनल, नंदा कान्वेंट स्कूल, यूसीएसएस स्कूल, एबीसी अल्मामतार सहित कई निजी स्कूलों ने बच्चों की परेशानियों को कम करने के लिए काउंसिलिंग का सहारा लिया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इससे काफी हद तक बच्चों की परेशानी को कम किया गया है।

चंपावत जिले के एक स्कूल का सातवीं का छात्र कोमल (बदला हुआ नाम) कोरोना के बाद स्कूल जाने से हिचकता है। कई बार गुस्सा करना और आपा खोना उसकी दिनचर्या में शुमार हो गया। अभिभावक किसी तरह बच्चे को स्कूल पहुंचाते लेकिन बच्चा वहां खोया रहता। ये उदाहरण कोरोना काल की ऑनलाइन पढ़ाई से कक्षा कक्ष की पढ़ाई तक के बदलाव की एक बानगी भर है। ऐसे अनेक उदाहरण कोरोना काल के बाद स्कूल खुलने पर आते रहे हैं। 

बच्चों में हुए ये बदलाव

-व्यवहार और बोलचाल के ढंग में परिवर्तन।
-लंबे समय तक एकाकीपन के कारण कई बच्चों को समूह में रहना नापसंद।
-बच्चों के बर्ताव में बदलाव आया। आक्रामकता बढ़ने से उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ा।
– ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान लापरवाही के कारण अब पढ़ाई में नहीं लग रहा मन

शिक्षकों से फोन पर पूछते थे सवाल
दो साल के दौर में मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्त रहे। घर पर ऑनलाइन पढ़ाई के समय अभिभावक साथ ही बैठे रहते थे लेकिन इसके बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई समझ नहीं आई। ऐसे में शिक्षकों से फोन पर पूछकर पूरी तरह समस्या का निराकरण करते थे। अब ऑफलाइन कक्षाओं में जब पढ़ाई के दौरान लगता है कि हम पढ़ाई में काफी पीछे रह गए हैं। – कंचन लुंठी, छात्रा, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर पिथौरागढ़।

धीरे-धीरे पढ़ाई में हटने लगा था ध्यान
घर पर कोरोना के दौर में किसी प्रकार दबाव भी नहीं था, लेकिन घर पर शिक्षक डांटने तो आने वाले नहीं थे। ऐसे में पढ़ाई से अपने आप ही धीरे-धीरे ध्यान हट गया। हालांकि न सोशल मीडिया में एक्टिव रहे न कुछ विशेष किया। अब स्कूल में आकर लगता है कि पढ़ाई की होती तो स्थिति बेहतर हो सकती थी। स्कूल में शिक्षक मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी कुछ और समय लगेगा। – नेहा नाथ, छात्रा, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर पिथौरागढ़।

ऑनलाइन पढ़ाई को सीमित रखना जरूरी
दो साल बाद कोरोना से बदलाव तो नहीं लगता है। अगर ऑनलाइन को बेहतर बनाया जाए तो निश्चित तौर पर बच्चों में पढ़ने की ललक बढ़ेगी। ऑनलाइन पढ़ाई को सीमित रखने की जरूरत है। अधिक उपयोग काफी नुकसानदायक साबित होता है। कई बार बच्चा ध्यान नहीं देता है। ऑफलाइन पढ़ाई में थोड़ा मानसिक दबाव है मगर शिक्षक हम पर लगातार काम कर रहे हैं। -राकेश, निखिलेश्वर चिल्ड्रन एकेडमी पिथौरागढ़।

अब पढ़ाई में नहीं दे पा रही ध्यान
ऑनलाइन पढ़ाई से सबकुछ चौपट हो गया है। ऑफलाइन से शिक्षकों से आमने सामने बात होती है। शिक्षक हमारी मनोदशा को बेहतर ढंग से कक्षा में समझ सकते थे, लेकिन अब कक्षा में आकर पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही हूं। पढ़ाई का दबाव तो है लेकिन किसी तरह की समस्या को शिक्षकों के साथ साझा कर समाधान हो जा रहा है। -मोनिका, निखिलेश्वर चिल्ड्रन एकेडमी पिथौरागढ़।

अभिभावकों और शिक्षकों की परेशानी

ऑनलाइन में बच्चा पूरी तरह ध्यान नहीं दे पा रहा था लेकिन ऑफलाइन के बाद मनोदशा में काफी बदलाव आया है। बच्चा खुद ही स्कूल के लिए तैयार हो रहा है। उसे किसी प्रकार की बात कहने की जरूरत नहीं होती है। जबकि ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चा उपस्थित तो रहता था, लेकिन उसका ध्यान किधर है, इसका पता नहीं लगता था। – सरिता, अभिभावक पिथौरागढ़

ऑफलाइन शिक्षण से आ रहा सुधार
ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ नाम की रही। बच्चों ने इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया। कोई कुछ कहना वाली नहीं था। बच्चों को डांटे भी तो कितना। ऑफलाइन पढ़ाई जबसे शुरू हुई है तो बच्चों को अपने स्तर का पता चला है कि वो कितने गहरे पानी में हैं। स्कूल में शिक्षक तो घर में अभिभावक उन पर नजर रखे हैं, ऐसे में उनकी स्थिति में सुधार आने लगा है। – आशा, अभिभावक पिथौरागढ़

बच्चों को समझाने में लग रहा समय
कोविड के बाद बच्चों की मनोदशा काफी बदल गई है। उन्हें चीजें समझाने में समय लग रहा है। कुछ ही बच्चे पढ़ाई में ध्यान दे रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अधिकतर बच्चों ने मोबाइल का दुरुपयोग किया, जिसके चलते उनकी मानसिक स्थिति काफी बदल गई है। ऐसे बच्चों को बार-बार विषयों के बारे में पढ़ाया जा रहा है। – प्रकाश चंद्र, शिक्षक, निखिलेश्वर चिल्ड्रन एकेडमी।

ऑफलाइन कक्षाओं में बच्चे दे रहे ध्यान
ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों की मनोदशा में काफी बदलाव आया है। जो होनहार बच्चा था, उसने तो किसी तरह अपने को पढ़ाई के लिए तैयार कर लिया लेकिन जो कमजोर बच्चा था, वो काफी पीछे रह गया। उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। हालांकि ऑफलाइन में बच्चा अधिक ध्यान अब देने लगा है। – सुशीला कार्की, शिक्षिका, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर पिथौरागढ़।

योग बढ़ाया, कम किया मोबाइल फोन का उपयोग
कोरोना काल के बाद बच्चों में बड़ा बदलाव नजर आया। इसके समाधान के लिए स्कूल में नियमित रूप से योग की कक्षाएं शुरू की गई। खेलकूद को बढ़ावा दिया गया। सबसे ज्यादा नुकसान मोबाइल फोन कर रहा है। इसलिए मोबाइल फोन के उपयोग को कम करने के लिए अभिभावकों और बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है। – विपिन चंद्र पांडेय, प्रधानाचार्य, उदयन इंटरनेशनल स्कूल, चंपावत।

मनोचिकित्सक का क्या कहना है
ऑनलाइन पढ़ाई ने छात्रों को काफी पीछे धकेल दिया है। उनका ध्यान ऑफलाइन पढ़ाई पर पहले के मुकाबले 50 फीसदी ही रह गया है। उन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों को किसी प्रकार का डर नहीं था। छात्र अपने मन से पढ़ाई करते थे। अब प्रत्येक छात्र पर ध्यान देने की अधिक जरूरत है। उनकी मनोदशा को फिर से पहले की तरह करने के लिए हर शिक्षण संस्थान को विशेष रूप से प्रयास करने होंगे। – डॉ. गुंजन देवलाल, मनोचिकित्सक पिथौरागढ़।

बच्चों को व्यस्त और खुश रखें
बच्चे चंचल और उन्मुक्त प्रवृति के होते हैं। एक जगह रहना उनके स्वभाव में नहीं। मौज-मस्ती, उछलकूद, खेलना-पढ़ना उनके स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है लेकिन कोरोना ने इन सबको प्रभावित किया है। इसके लिए ये जरूरी है कि उन्हें व्यस्त और खुश रखा जाए। पढ़ाई और किसी तरह का दबाव न डाला जाए। इससे उनकी मनोदशा में बदलाव धीमे-धीमे आएगा। – डॉ. जीबी बिष्ट, सेवानिवृत्त पीएमएस, नैनीताल।

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