दिनांक 05 सितम्बर 2022

शिक्षक दिवस के अवसर पर मण्डलायुक्त श्री आन्जनेय कुमार सिंह और जिलाधिकारी श्री रविन्द्र कुमार माँदड़ ने रामपुर शहर स्थित मॉडल मान्टेसरी स्कूल का फीता काटकर शुभारम्भ किया।

 इस दौरान उन्होंने जनपद में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। 

मॉडल मान्टेसरी स्कूल अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 08 तक पुनः संचालित किया गया है तथा जनपद के योग्य शिक्षकों द्वारा अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान की जायेगी। 

मण्डलायुक्त ने कहा कि इतिहास को बार-बार इसलिए याद रखना चाहिए कि कही गलत हुआ है तो उसे हम न दोहराएं और यदि कहीं सही हुआ है तो उसे याद रखें। सिन्धु घाटी सभ्यता आज भी हम सभी पढ़ते हैं क्योंकि उसकी नगरीय प्रणाली और जल निकास व्यवस्था आज भी हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। इतिहास हमें विभिन्न घटनाओं के आधार पर तर्क करना सिखाता है। जो समाज तर्क करना छोड़ देगा वह बार-बार गलतियां करेगा और सिर्फ एक लकीर पर चलेगा। उन्होंने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि शिक्षा मात्र किताबी नहीं होती है। द्रोणाचार्य, शुक्राचार्य और विश्वामित्र जैसे गुरूओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि परिवार से निकलकर बच्चों के लिए अध्यापकों द्वारा दी गई शिक्षा ही उनमें ज्ञान का प्रकाश करती है। 

उन्होंने द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य से अंगूठा मांगने की कहानी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में समाज के सबसे निचले तबके के बच्चे आते है जो उस एकलव्य की भांति होते हैं, उन्हें हमें खड़ा करना है और ऐसे तैयार करना है कि फिर कोई द्रोणाचार्य उसका अंगूठा न मांग सके और किसी शुक्राचार्य के जाल में वह न फंस सके। बच्चे जब इतिहास में इस बिल्डिंग के बारे में पढ़ेगे तो इस मिट्टी को देखकर गौरव की अनुभूति होगी कि कभी जिसने गवर्नर का आतिथ्य किया था, गांधी जी का आतिथ्य किया था और कभी जिसने रामपुर से गांधी टोपी को पहचान दी। इस बिल्डिंग से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों को पेटिंग्स में दर्शाने की भी कोशिश की जायेगी। 

कर्नल यूनुस खान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में उन्हें जगह नहीं दी गई और हम उन्हें बहुत देर में समझ सके। उन्होंने इसी मिट्टी को चूमकर इसमें दफन होना मंजूर किया। हमें उनको नहीं भूलना चाहिए। यह बिल्डिंग इसकी भी याद दिलायेगी। शिक्षा के लिए सबसे बुनियादी चीज है शिक्षा लेने वाला और शिक्षा देने वाला। बाकी सभी चीजे बाद में आती है। बुनियाद बेहतर होना बहुत जरूरी है और इतिहास हमारी बुनियाद है। बुनियाद के रूप में इतिहास पर्त-दर-पर्त जमा होता है। जब वह दबता है तो हीरा और कोयला बनकर पुनः हमारे काम आता है। पहली से लेकर आठवीं तक की शिक्षा बुनियादी शिक्षा होती है। बिना गुरू और शिष्य के समर्पण के विद्या का ज्ञान होना सम्भव नहीं है। हमारे प्राथमिक विद्यालयों में समाज के सबसे कमजोर तबके वाले परिवारों के बच्चे आते हैं और सरकार उन्हें शिक्षित बनाने की जिम्मेदारी लेनी है। उन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ भोजन का भी प्रबन्ध करती है। 

प्राथमिक विद्यालयों में आने वाले बच्चों के प्रति अध्यापकों को अधिक मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा ज्ञानवान बनता है तो वह एपीजे अबुल कलाम की भांति राकेट भी उड़ायेगा और सितार भी बजायेगा। यदि विद्यालयों में बच्चें कम आते है तो इसका मतलब है कि या तो अध्यापक ठीक से बच्चों को पढ़ा नहीं रहे हैं या अभिभावको को अपने बच्चो पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में एक आंगनवाड़ी केन्द्र भी संचालित होना चाहिए। जिलाधिकारी और उनकी टीम ने निरूसन्देह बहुत मेहनत की है और  उन्होंने सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं सँवारी है बल्कि वे इतिहास रच रहें है तथा शिक्षा की बुनियाद रख रहें है।  जिले में आंगनवाड़ी केन्द्रों की भांति प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी अतिकुपोषित, कुपोषित और सामान्य श्रेणी में विभाजित किया जाएगा।

मण्डलायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों की 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति पर लाल संकेतक के रूप में कुपोषित श्रेणी, 50 से 70 प्रतिशत उपस्थिति होने पर पीला संकेतक के रूप में कुपोषित श्रेणी और 70 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति पर हरा संकेतक के साथ सामान्य श्रेणी दी जाएगी।  विद्यालयों में बच्चों का टेस्ट होगा और उन बच्चो के टेस्ट परिणाम के अनुसार अध्यापकों की हर माह ग्रेडिंग होगी। इस पूरी प्रक्रिया में जो लाल से पीली श्रेणी में अपने कार्यों को नहीं लायेंगे तो मुख्यमंत्री जी के सामने ऐसे मामले रखे जायेंगे। अध्यापकों में क्षमताएं है इसलिए पूर्णमनोयोग के साथ बच्चों को शिक्षित बनाएं। 

जिलाधिकारी श्री रविन्द्र कुमार मॉदड़ ने कहा कि रामपुर की यह बिल्डिंग इतिहास और वर्तमान में बहुत ही विशेष स्थान रखती है। बेसिक शिक्षा और नगर पालिका के संयुक्त प्रयास से निर्धारित कार्ययोजना को 15 दिवसों में लागू कराया गया है। अभी यह शुरूआत है और प्रशासनिक योजना के अनुसार यह मॉडल मॉन्टेसरी स्कूल रामपुर के उत्कृष्ट और मॉडर्न रूप में आगामी 03 माह में बनकर तैयार होगा। यहाँ निजी विद्यालयों से भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। बेसिक शिक्षा के अत्यन्त सक्रिय शिक्षकों को साक्षात्कार के आधार पर इस विद्यालय में तैनाती मिलेगी तथा उन उत्कृृष्ट श्रेणी के शिक्षकों को यहॉ अध्यापन का अवसर दिया जायेगा। 

यहॉ 04 विद्यालयों के लगभग 400 बच्चे शिफ्ट किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जैसे इस मॉडल मॉन्टेसरी स्कूल में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए अभिभावकों को काफी प्रयास करने पड़ते थे वैसे ही भविष्य में भी गुणवत्ता युक्त शैक्षिक माहौल होगा और यह स्कूल अभिभावकों की पहली पसन्द बनेगा। 

विद्यालय में माडर्न प्ले-ग्राउण्ड और सभी कक्षाओं को स्मार्ट क्लास के रूप में तैयार कराया जायेगा। यहाँ कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब और पुस्तकालय की सुविधाएं होगी। 

उन्होंने कहा कि इस बिल्डिंग का अपना गौरवशाली इतिहास है। आजादी के लिए संघर्ष के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आगमन की स्मृतियों को सजोने और उनके संस्मरण में एक हिस्सा संग्रहालय के रूप में सुरक्षित कराया जायेगा ताकि बच्चे, उनके अभिभावक और आमजनों को हमारे शहर की इस बिल्डिंग के गौरवशाली इतिहास को लेकर जानकारी हो सके। 

पूरी टीम को इस पूरी संकल्पना को साकार बनाने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। 

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर जागीर और उच्च प्राथमिक विद्यालय घाटमपुर सहित विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्री नंदकिशोर कलाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती कल्पना सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री राजेश कुमार और जिला पंचायत राज अधिकारी श्री दुर्गा प्रसाद तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण एवं भारी संख्या में अध्यापक व आमजन मौजूद रहे।

 

   

Leave a Reply

Your email address will not be published.