दिल्ली पुलिस ने जफरुल इस्लाम को जारी किया नोटिस, 12 मई तक जमा करें मोबाइल और लैपटॉप

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दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नोटिस जारी किया है। उन्हें 12 मई तक उस लैपटॉप या मोबाइल को जमा करने को कहा गया है, जिससे उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की थी।

मालूम हो कि यह सारा विवाद जफरुल द्वारा किए गए एक विवादित पोस्ट से खड़ा हुआ है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि जिस दिन मुसलमानों ने अरब देशों से अपने खिलाफ जुल्म की शिकायत कर दी, सैलाब आ जाएगा। इस पोस्ट के बाद भाजपा ने इसका विरोध करते हुए उनसे इस्तीफा मांगा।

जफरुल इस्लाम ने मंगलवार को अपनी लंबी फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि भारतीय मुस्लिमों के साथ खड़े होने के लिए धन्यवाद कुवैत। हिंदुत्व विचारधारा के लोग सोचते हैं कि कारोबारी हितों की वजह से अरब देश भारत के मुस्लिमों की सुरक्षा की चिंता नहीं करेंगे।

वे भूल गए कि भारतीय मुस्लिमों के अरब और मुस्लिम देशों से कैसे रिश्ते हैं। जिस दिन मुसलमानों ने अरब देशों से अपने खिलाफ जुल्म की शिकायत कर दी, सैलाब आ जाएगा।

विवाद खड़ा होने पर जफरुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी देश के खिलाफ जाकर नहीं बोला है। हिंदुत्व का मतलब कुछ लोग भारत से जोड़ रहे हैं। यह गलत है। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

वहीं इस पोस्ट के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया। शुक्रवार को जफरुल ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसपर मंगलवार को सुनवाई होगी।

इससे पहले बुधवार शाम को ही साइबर सेल की टीम पूछताछ में शामिल होने के लिए इस्लाम को लेने गई थी। इस दौरान कुछ लोग एकत्रित हो गए थे। इस कारण साइबर सेल की टीम वापस लौट आई थी।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार जफरुल खान ने बुधवार शाम को साइबर सेल को चिट्ठी लिखी थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि वह 72 वर्ष के सीनियर सिटीजन हैं। हृदय रोग के अलावा उन्हें कई बीमारियां हैं। इस कारण वह पूछताछ में सहयोग करने लिए पुलिस स्टेशन नहीं आ सकते।

जफरुल इस्लाम ने यह भी कहा था कि वह अपने घर पर दिन के समय पूछताछ के लिए उपलब्ध हैं।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नोटिस जारी किया है। उन्हें 12 मई तक उस लैपटॉप या मोबाइल को जमा करने को कहा गया है, जिससे उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की थी।

मालूम हो कि यह सारा विवाद जफरुल द्वारा किए गए एक विवादित पोस्ट से खड़ा हुआ है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि जिस दिन मुसलमानों ने अरब देशों से अपने खिलाफ जुल्म की शिकायत कर दी, सैलाब आ जाएगा। इस पोस्ट के बाद भाजपा ने इसका विरोध करते हुए उनसे इस्तीफा मांगा।

जफरुल इस्लाम ने मंगलवार को अपनी लंबी फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि भारतीय मुस्लिमों के साथ खड़े होने के लिए धन्यवाद कुवैत। हिंदुत्व विचारधारा के लोग सोचते हैं कि कारोबारी हितों की वजह से अरब देश भारत के मुस्लिमों की सुरक्षा की चिंता नहीं करेंगे।

वे भूल गए कि भारतीय मुस्लिमों के अरब और मुस्लिम देशों से कैसे रिश्ते हैं। जिस दिन मुसलमानों ने अरब देशों से अपने खिलाफ जुल्म की शिकायत कर दी, सैलाब आ जाएगा।

विवाद खड़ा होने पर जफरुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी देश के खिलाफ जाकर नहीं बोला है। हिंदुत्व का मतलब कुछ लोग भारत से जोड़ रहे हैं। यह गलत है। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

वहीं इस पोस्ट के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया। शुक्रवार को जफरुल ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसपर मंगलवार को सुनवाई होगी।

साइबर सेल के साथ जाने से किया था इनकार

इससे पहले बुधवार शाम को ही साइबर सेल की टीम पूछताछ में शामिल होने के लिए इस्लाम को लेने गई थी। इस दौरान कुछ लोग एकत्रित हो गए थे। इस कारण साइबर सेल की टीम वापस लौट आई थी।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार जफरुल खान ने बुधवार शाम को साइबर सेल को चिट्ठी लिखी थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि वह 72 वर्ष के सीनियर सिटीजन हैं। हृदय रोग के अलावा उन्हें कई बीमारियां हैं। इस कारण वह पूछताछ में सहयोग करने लिए पुलिस स्टेशन नहीं आ सकते।

जफरुल इस्लाम ने यह भी कहा था कि वह अपने घर पर दिन के समय पूछताछ के लिए उपलब्ध हैं।

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