कोरोना के आगे क्यों फेल हो रहा भारत का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर? आम लोगों पर पाबंदियां और नेता कर रहे हैं चुनावी रैली

0
196

 

भारत में कोविड-19 के रिकॉर्ड 2,34,692 नए मामले सामने आने के बाद देश में अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,45,26,609 हो गई है, वहीं एक दिन में अब तक सर्वाधिक 1,341 लोगों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 1,75,649 हो गई है।

देश में कोरोना वायरस के मामलों में तेज वृद्धि के बीच जिस तरह से हैल्थ सिस्टम फेल नजर आ रहा है उसको देखते हुए सरकारों की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि जब पिछले साल से इतनी तैयारियां की गयी थीं तो अब सरकार इतनी बेबस क्यों नजर आ रही है। इन्हीं सब अव्यवस्था संबंधी मुद्दों को देखते हुए राजनीतिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ गये हैं। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में जिस तरह भाजपा की रैलियों में भीड़ उमड़ रही है उसको देखते हुए भी सवाल उठ रहे हैं कि आम आदमी को कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करने की सीख देने वाले नेता खुद क्यों नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं? इन्हीं दो सवालों को लेकर हमने प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में चर्चा की। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि जब पिछली बार कोरोना वायरस हमारे देश में आया था तो हमने इसके खिलाफ बेहतरीन तरीके से लड़ाई लड़ी थी। हम इसे जानते तक नहीं थे, ना ही हमारे पास सभी चीजों की सुविधाएं थी। फिर भी हमने रणनीतिक तौर पर पिछले साल कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई को कम से कम जीत लिया था। पिछले साल पीपीई किट, लैब, सैनिटाइजर जैसी चीजें हमारे यहां नहीं हुआ करती थी। अब व्यवस्थाएं तमाम हो गई हैं। सीमित संसाधनों में पिछले साल इसका मुकाबला कर सकते थे तो अब हम कहां चूक रहे हैं? इस पर विचार करने की जरूरत है। आज हम अगर कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में एक नंबर पर पहुंचे हैं तो जाहिर सी बात है कहीं ना कहीं हमने चूक जरूर की है। हमारी रणनीति कहीं ना कहीं फेल जरूर हुई है और हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल जरूर उठेंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि हमने जीत की खुशी में कोरोना प्रोटोकॉल को मानना बंद कर दिया था जिसका नतीजा एक बार फिर से हम सबके सामने है।

आज राज्यों ने कोरोना वायरस के सामने घुटने टेक दिए हैं। पूरी तरह से वह केंद्र पर निर्भर हो गए हैं। कई जगह ऑक्सीजन की कमी है तो कई जगह इंजेक्शन की कमी है। दवाइयों की भी कालाबाजारी हो रही है। कहीं ना कहीं यह सब चीजें हमारी व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली में भीड़ के जवाब में नीरज कुमार दुबे ने कहा कि जाहिर सी बात है कि कोरोना वायरस के दौरान इस तरीके के चुनाव महामारी को और भी व्यापक कर सकता है। रैलियों में जुटने वाली भीड़ में शायद ही कोई मास्क का इस्तेमाल कर रहा होगा। इसके लिए ना तो मंच से किसी भी प्रकार का आह्वान किया जाता है और ना ही लोग मास्क लगा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि जाहिर सी बात है कि इससे एक बात का संदेश जरूर जा रहा है कि नेता हमारे कहते कुछ हैं और करते कुछ और है।

कोविड-19: भारत में एक दिन में सर्वाधिक 1,341 लोगों की मौत, संक्रमण के 2,34,692 नए मामले

भारत में कोविड-19 के रिकॉर्ड 2,34,692 नए मामले सामने आने के बाद देश में अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,45,26,609 हो गई है, वहीं एक दिन में अब तक सर्वाधिक 1,341 लोगों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 1,75,649 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 16 लाख से अधिक हो गई है। संक्रमण के मामलों में लगातार 38वें दिन वृद्धि हुई है। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 16,79,740 हो गई है जो संक्रमण के कुल मामलों का 11.56 प्रतिशत है जबकि संक्रमित लोगों के स्वस्थ होने की दर गिरकर 87.23 प्रतिशत रह गई है। इस बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1,26,71,220 हो गई है और मृत्यु दर गिरकर 1.21 प्रतिशत हो गई है। भारत में कोविड-19 के मामले पिछले साल सात अगस्त को 20 लाख की संख्या पार कर गए थे।

इसके बाद संक्रमण के मामले 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के पार चले गए थे। वैश्विक महामारी के मामले 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख और 19 दिसंबर को एक करोड़ से अधिक हो गए थे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के मुताबिक, अब तक 26,49,72,022 नमूनों की जांच की जा चुकी है जिनमें से 14,95,397 नमूनों की जांच शुक्रवार को की गई। महाराष्ट्र में 63,729, उत्तर प्रदेश में 27,426 और दिल्ली में 19,486 नए मामले सामने आए हैं। इन तीनों राज्यों में पिछले साल वैश्विक महामारी फैलने के बाद से कोरोना वायरस के अब तक के सर्वाधिक दैनिक मामले सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल में भी अब तक के सर्वाधिक 6,910 दैनिक मामले सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 398 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा दिल्ली में 141, छत्तीसगढ़ में 138, उत्तर प्रदेश में 103, गुजरात में 94, कर्नाटक में 78 , मध्य प्रदेश में 60, पंजाब में 50, तमिलनाडु में 33 और राजस्थान में 31 लोगों की मौत संक्रमण से हुई है।

‘दीदी’ खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष केंद्रीय बलों और सेना तक को ‘‘बदनाम’’ किया और राजनीति के लिए झूठे आरोप लगाए। यहां एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया दो मई को पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें ‘‘भूतपूर्व मुख्यमंत्री’’ का प्रमाणपत्र देने वाली है। केंद्र सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण सहित अन्य मुद्दों पर बुलाई गई बैठकों में ममता बनर्जी की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि ‘‘दीदी’’ अपने अहंकार में इतनी बड़ी हो गई है की हर कोई उन्हें अपने आगे छोटा दिखता है। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने अनेक बार अनेक विषयों पर बात करने के लिए बैठकें बुलाई है लेकिन दीदी कोई न कोई कारण बताकर इन बैठकों में नहीं आती हैं। कोरोना वायरस को लेकर बुलाई गई पिछली दो बैठकों में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आई।’’ उन्होंने कहा यही नहीं, नीति आयोग की संचालन परिषद और गंगा की सफाई के लिए बुलाई गई बैठकों में भी वह नहीं आईं। उन्होंने कहा, ‘‘एक दो बार ना आने तो समझ में आता है, लेकिन दीदी ने यही तरीका बना लिया है। दीदी बंगाल के लोगों के लिए कुछ देर का समय नहीं निकाल पाती हैं। यह उन्हें समय की बर्बादी लगता है।’’

मोदी ने कुंभ को कोरोना संकट के चलते ‘प्रतीकात्मक’ रखने की अपील की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस से संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर शनिवार को संत समाज से उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे कुंभ को ‘‘प्रतीकात्मक’’ रखने की अपील की ताकि इस महामारी के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी जा सके। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर यह जानकारी दी कि उन्होंने जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से इस सिलसिले में फोन पर बात की और साथ ही संतों का कुशल-क्षेम भी पूछा। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रार्थना की है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं और अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए। इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी।’’ एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी अवधेशानंद से बात कर उन्होंने सभी संतों के स्वास्थ्य का हाल जाना। उन्होंने कहा, ‘‘सभी संतगण प्रशासन को हर प्रकार का सहयोग कर रहे हैं। मैंने इसके लिए संत जगत का आभार व्यक्त किया।’’

कोरोना वायरस की दूसरी लहर 100 दिनों तक रह सकती है: विशेषज्ञ का परामर्श

दक्षिण पूर्व दिल्ली पुलिस के लिए एक विशेषज्ञ द्वारा तैयार किये गये एक परामर्श के अनुसार, कोरोना वायरस की दूसरी लहर 100 दिनों तक रह सकती है और इस तरह की लहरें 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण होने और हर्ड इम्युनिटी हासिल करने तक आती रहेंगी। हर्ड इम्युनिटी, संक्रामक बीमारियों के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से बचाव होता है। यह तब होता है जब आबादी या लोगों का समूह या तो टीका लगने पर या फिर संक्रमण से उबरने के बाद उसके खिलाफ इम्युनिटी विकसित कर लेता है। समूह की इस सामूहिक इम्युनिटी को ही ‘हर्ड इम्युनिटी’ कहते हैं। पुलिसकर्मियों के बीच जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, डॉ. नीरज कौशिक के परामर्श में कहा गया है कि नये म्यूटेंट वायरस में प्रतिरक्षा और यहां तक कि टीके का असर छोड़ने की भी क्षमता है। ‘‘ऐसे लोग जिनका टीकाकरण हो चुका है, उनमें पुन: संक्रमण और मामलों का यही कारण है।’’ डॉ. कौशिक के दस्तावेज में कहा गया है कि यह उत्परिवर्तित वायरस (म्यूटेटेड वायरस) इतना संक्रामक है कि यदि एक सदस्य प्रभावित होता है, तो पूरा परिवार संक्रमित हो जाता है। यह बच्चों पर भी हावी है। उन्होंने कहा कि नियमित आरटी-पीसीआर जांच म्यूटेटेड वायरस का पता नहीं लगा सकती हैं। हालांकि, गंध महसूस नहीं होना एक बड़ा संकेत है कि व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है। परामर्श में कहा गया है, ‘‘कोरोना वायरस की दूसरी लहर 100 दिनों तक रह सकती है। ऐसी लहरें तब तक आती रहेंगी जब तक कि हम 70 प्रतिशत टीकाकरण और हर्ड इम्युनिटी को प्राप्त नहीं कर लेते। इसलिए अपने सुरक्षा उपायों विशेषकर मास्क लगाना नहीं छोड़ें।

 

केंद्र ने छत्तीसगढ़, उप्र से आईसीयू बिस्तर, एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने को कहा

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश को पृथकवास, ऑक्सीजन, आईसीयू बिस्तर तथा एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा कोविड-19 के मामलों का जल्द पता लगाकर मृत्यु दर में कमी लाने एवं राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का पालन करने का सुझाव दिया। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के साथ छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की तथा गैर जरूरी यात्रा नहीं करने तथा सार्वजनिक स्थलों पर भीड़भाड़ रोकने का सख्ती एवं प्रभावी ढंग से पालन करने पर जोर दिया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र ऐसे राज्य हैं, जहां एक लाख से अधिक उपचाराधीन मरीज हैं। छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के प्रतिदिन काफी संख्या में नये मामले सामने आ रहे हैं और मौतें भी हो रही हैं। छत्तीसगढ़ में सात दिनों की गतिशील औसत के आधार पर साप्ताहिक नये मामले में तकरीबन 6.2 प्रतिशत वृद्धि की रिपोर्ट है। स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘‘पिछले दो सप्ताह में राज्य में साप्ताहिक नये मामलों में तकरीबन 131 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है। छत्तीसगढ़ में 22 जिलों ने पिछले 30 दिनों में सर्वाधिक मामलों की संख्या को पार कर लिया है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित रायपुर, दुर्ग, राजनंदगांव और बिलासपुर सबसे अधिक प्रभावित हैं।’’

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here