सुपुर्द-ए-खाक हुए अभिनेता इरफान खान, कब्रिस्तान में मौजूद रहे दोनों बेटे बाबिल और अयान

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता इरफान खान का 54 साल की उम्र में निधन हो गया है। 29 अप्रैल 2020 की सुबह 11.30 पर लंबी बीमारी के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। अचानक तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इसी अस्पताल में इरफान खान ने अंतिम सांस ली। इस खबर के आते ही बॉलीवुड इंडस्ट्री सहित पूरे देश में शोक की लहर छा गई। सोशल मीडिया पर चारों तरफ केवल इरफान खान को ही लोग अपने-अपने शब्दों में श्रद्धांजलि दे रहे हैं।  इरफान खान का अंतिम संस्कार बहुत ही साधारण तरीक से किया गया। लॉकडाउन के कारण मुंबई में नियम बहुत ही कड़े हैं ऐसे में इरफान की अंतिम यात्रा में केलव 20 लोग ही शामिल हुए।
 

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Repost from @officialsandipssingh Never imagined shouldering the burden of your loss would weigh so heavy on my heart. Thank you Irrfan Bhai for standing by me in my times of crisis. You were there when not many wanted to even acknowledge me. You are one of a kind and I will continue to use present tense, because for me human beings like you never die. Your persona, your aura, your love for cinema and your philosophy of life will continue to remain an inspiration and guide me. Thank you God for allowing me to walk with Irrfan Bhai one last time. Feel blessed to have gotten a chance to bid goodbye even as crores of your fans and friends wanted to be there. You are gone too soon, Bhai. #ripirfankhan #rip 🙏🤲

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) on Apr 29, 2020 at 4:16am PDT

 

 
उनका अंतिम संस्कार बुधवार शाम 5 बजे मुंबई के वर्सोवा स्थित कब्रिस्तान में किया गया. जहां उनका परिवार और दोनों बेटे मौजूद थे। बहुत मुश्किल से अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए प्रशासन की तरफ से विशाल भारद्वाज और तिगमांशु धूलिया को शमिल होने की इजाज़त मिली। ज्यादा लोगों को अंतिम यात्रा में शामिल इस लिए भी नहीं होने दिया गया क्योंकि इरफान खान को फैन भारत सहित पूरी दुनिया है ऐसे में भीड़ को कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल हो जाता। 
 

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इरफान ने अपनी जिंदगी की हर जंग एक योद्धा की तरह लड़ी है फिर चाहें वो अपने करियर की हो या फिर जानलेवा बीमारी की। कैंसर जैसी बीमारी को उन्होंने हराया और फिल्म अंग्रेजी मीडियम से पर्दे पर वापसी की। देश के मुश्किल हालात जल्द से जल्द ठीक हो जाए उसके लिए बीमार होने के बावजूद उन्होंने 12 घंटे का व्रत रखा और ईश्वर से प्रार्थना की। इरफान खान एक अच्छे अभिनेता के साथ-साथ एक दिलखुश और धर्म-जाति से उपर इंसानियत को रखने वाले शख्स थे। इरफान का व्यक्तित्व ऐसा था जिसे आप एक शब्द में नहीं परिभाषित कर सकते। इरफान को जानने के लिए किताब का एक पन्ना पढ़ना काफी नहीं है उन्हें समझने के लिए पूरी किताब पढ़नी होगी। दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी लोगों के जहन में इन्हें जो जिंदा रखेगा वो है उनके द्वारा निभाए गये किरदार। 

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