इटली: भविष्य की चिंता में गांवों की तरफ लौट रहे युवा, हिंसा और नशे से चाहते हैं छुटकारा

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एक समय कोरोना वायरस महामारी का बुरी तरह प्रकोप झेल रहे ब्रिटेन के लोगों ने अब गांवों की तरफ लौटना शुरू कर दिया है। ये लोग भविष्य में आने वाली किसी भी तरह की महामारी से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। 

गांवों की तरफ लौट रहे लोगों का कहना है कि इससे भविष्य में किसी भी महामारी या संक्रमण से निपटने में मदद मिलेगी। इनमें बड़ी तादाद में युवा शामिल हैं। ज्यादातर युवाओं का कहना है कि वे शहरों की भीड़भाड़, हिंसा, आतंकवाद और नशे जैसी चीजों से छुटकारा चाहते हैं। 

लोगों का कहना है कि अब गांवों में भी शहरों जैसी ज्यादातर सुविधाएं मौजूद हैं और इंटरनेट की वजह से ऑफिस के कई काम आसान हो गए हैं। ऐसे में उनपर शहरों में पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।

इटली का संस्कृति मंत्रालय भी अब ग्रामीण इलाकों में पर्यटन, उद्योग और सुविधाएं बढ़ाने पर विचार कर रहा है। गांवों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने से सामाजिक और आर्थिक संगठन सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे सूने हो चुके गांवों को आबाद किया जा सके। 

मिलान में कई इकोफ्रेंडली इमारतें बना चुके मशहूर आर्किटेक्ट स्टीफानो बोइरी ने कहा कि अब शहरों को संक्रमण बम बनने से रोकना जरूरी है। इटली में कम से कम 5800 गांव ऐसे हैं जिनकी आबादी पांच हजार से भी कम है। इनके अलावा करीब 2300 गांव ऐसे हैं जहां कोई नहीं रहता। 

गांवों में लोगों के रहने से शहरों का बोझ भी कम होगा। वहीं, एक समाजशास्त्री कहते हैं कि महामारी ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। उन्हें पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में खाली पड़े गांवों में बसने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

एक समय कोरोना वायरस महामारी का बुरी तरह प्रकोप झेल रहे ब्रिटेन के लोगों ने अब गांवों की तरफ लौटना शुरू कर दिया है। ये लोग भविष्य में आने वाली किसी भी तरह की महामारी से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। 

गांवों की तरफ लौट रहे लोगों का कहना है कि इससे भविष्य में किसी भी महामारी या संक्रमण से निपटने में मदद मिलेगी। इनमें बड़ी तादाद में युवा शामिल हैं। ज्यादातर युवाओं का कहना है कि वे शहरों की भीड़भाड़, हिंसा, आतंकवाद और नशे जैसी चीजों से छुटकारा चाहते हैं।

लोगों का कहना है कि अब गांवों में भी शहरों जैसी ज्यादातर सुविधाएं मौजूद हैं और इंटरनेट की वजह से ऑफिस के कई काम आसान हो गए हैं। ऐसे में उनपर शहरों में पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।

इटली का संस्कृति मंत्रालय भी अब ग्रामीण इलाकों में पर्यटन, उद्योग और सुविधाएं बढ़ाने पर विचार कर रहा है। गांवों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने से सामाजिक और आर्थिक संगठन सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे सूने हो चुके गांवों को आबाद किया जा सके। 

मिलान में कई इकोफ्रेंडली इमारतें बना चुके मशहूर आर्किटेक्ट स्टीफानो बोइरी ने कहा कि अब शहरों को संक्रमण बम बनने से रोकना जरूरी है। इटली में कम से कम 5800 गांव ऐसे हैं जिनकी आबादी पांच हजार से भी कम है। इनके अलावा करीब 2300 गांव ऐसे हैं जहां कोई नहीं रहता। 

गांवों में लोगों के रहने से शहरों का बोझ भी कम होगा। वहीं, एक समाजशास्त्री कहते हैं कि महामारी ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। उन्हें पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में खाली पड़े गांवों में बसने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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