बेबस मजदूरों का सफर जारी हाल दिल का पूछो न पेट का..

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बरेली। लॉकडाउन में हरियाणा-दिल्ली से पैदल ही लंबा सफर तय करके अपने घर लौट रहे मजदूरों को शासन के निर्देश के बावजूद पुलिस-प्रशासन से मदद नहीं मिल रही है। न रुकने के पर्याप्त इंतजाम हैं न खाने और जांच के। शुक्रवार दोपहर उत्तराखंड, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जिलों से पैदल आए 40 से ज्यादा मजदूरों का जत्था पुलिस के सामने से भूखा-प्यासा और थका-हारा शहर से गुजर गया। किसी ने उनका हाल तक न पूछा।

दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर लगातार पैदल या साइकिलों से अपने घर लौट रहे हैं। शासन ने सभी जिलों को इन मजदूरों के लिए जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों पर कहीं अमल होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को शहर के कुदेशिया फाटक, कोहाड़ापीर, बरेली कॉलेज रोड, श्यामगंज चौराहा, सेटेलाइट चौराहा, चौपुला आदि मुख्य चौराहों से होते हुए 40 मजदूरों का जत्था पुलिस के सामने ही पैदल शहर से गुजर गया, किसी ने उनका हालचाल पूछने की भी जहमत नहीं उठाई।
सेटेलाइट रोड पहुंचे मजदूर अरमान ने बताया कि वह नैनीताल में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में काफी दिन फंसे रहने के बाद पांच दिन पहले दूसरे मजदूरों के साथ पैदल ही निकल आए। रास्ते में कई जगह खाना तो मिला लेकिन कई जगह पुलिस वालों ने बदसलूकी भी की। अरमान ने बताया कि उनके साथ बिहार के छपरा, गोरखपुर और आसपास जिलों के मजदूर हैं। गोरखपुर जा रहे अभिषेक और उनके साथियों ने बताया कि वे रेलवे लाइन के किनारे होकर दो मई को गाजियाबाद से चले थे।
राजस्थान से खीरी के लिए पैदल निकले पच्चूलाल
लखीमपुर खीरी के गांव सेमरी के पच्चूलाल राजस्थान के अलवर में ट्रैक्टर-थ्रेसर से गेहूं की फसल की गहाई करते थे। सेटेलाइट स्टैंड पर खड़े पच्चू ने बताया कि वह छह मजदूरों के साथ पैदल चार मई को निकले थे। रास्ते में कहीं कोई वाहन मिला तो उससे मदद ले ली, नहीं तो कभी खेतों और रेल की पटरियों पर चले। बरेली में वह पानी पीने के लिए रुके तो साथी उन्हें छोड़कर चले गए। अब वह परेशान हैं कि घर कैसे पहुंचें। पिकेट ड्यूटी कर रहे दरोगा नसीम खान ने उन्हें आगे भिजवाने का इंतजाम करने का आश्वासन दिया। यहीं बैठे टनकपुर के राजू कश्यप कासगंज से आए थे। बिहार के कटिहार के आदित्य पटेल ने बताया कि पीलीभीत की मार्केटिंग कंपनी में काम करते थे। दो महीने से कमरे में ही कैद थे। मकान मालिक से किराये को लेकर विवाद हो गया। अब वह घर पहुंचना चाहते हैं।

एडीजी बोले- रेलवे लाइन से गुजरते पाए गए मजदूर तो पुलिस पर होगी कार्रवाई
एडीजी अविनाश चंद्र ने जोन के सभी जिलों की पुलिस को मजदूरों को रोककर मदद करने और गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करने का आदेश दे रखा है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद की घटना के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि मजदूर कहीं भी रेलवे लाइन से होकर जाते पाए गए तो संबंधित थाना पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होगी। लॉकडाउन में भी मालगाड़ियां और विशेष ट्रेनें पटरी से गुजर रही हैं, इसलिए पटरी पर चलना खतरनाक है। उन्होंने बताया कि मजदूर जिस जिले में हैं, वहां के थाना या तहसील प्रशासन से संपर्क कर लें। उन्हें खाना, रहने की व्यवस्था तत्काल दी जाएगी। प्रदेश के मजदूरों को बसों और बाहरी मजदूरों को ट्रेनों से भिजवाने की व्यवस्था शासन से लगातार की जा रही है।

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