पिता की दवा लेने के लिए बेटे ने 160 किमी साइकिल चलाई, कहीं बीमार बेटे को अस्पताल पहुंचाने के लिए पिता ने 18 किमी ठेला चलाया

0
12

  • बीते 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से यूपी के ज्यादातर जिलों में लॉकडाउन हो गया था
  • लॉकडाउन के चलते रोज कमाने खाने वालों, बीमार लोगों को हुई सबसे ज्यादा दिक्कत 

Apr 30, 2020, 03:25 PM IST

लॉकडाउन ने देश में संक्रमण को काबू में रखने में मदद तो की है, लेकिन इसके चलते साधनों और पैसों की जो दिक्कतें खड़ी हुई हैं, उनके चलते लोगों को दुश्वारियों का सामना भी करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के तीन शहरों में ऐसी ही दुश्वारियों की 4 कहानियां मिली हैं। कहीं बीमार पिता की दवा लाने के लिए बेटे को 160 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ी तो कहीं बीमार बेटे को अस्पताल पहुंचाने के लिए पिता ने ही 18 किलोमीटर तक ठेला खींचा। 3 शहर, 3 कहानियां…

बलरामपुर: बीमार बेटे को 18 किलोमीटर दूर ठेले से पहुंचाया अस्पताल

सोनपुर गांव में रहने वाले अंगनू के 15 साल के बेटे राजाराम की मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई। पड़ोसियों ने एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर पर फोन किया, लेकिन कॉल नहीं लगी। बेटे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, ऐसे में अंगनू उसे ठेले पर लादकर 18 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां कुछ स्टाफ था, लेकिन उन्होंने कहा कि बच्चे को संयुक्त चिकित्सालय ले जाओ। अंगनू यहां से बेटे को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचा। इस अस्पताल से भी अंगनू के बेटे को बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अंगनून ने बताया कि बलरामपुर अस्पताल में डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया, एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिली। 
सीएमएस एनके बाजपेई ने कहा कि मरीज को बेहोशी हालत में संयुक्त हॉस्पिटल लाया गया था। स्थिति गंभीर लगी इसलिए उसे बहराइच रेफर कर दिया गया था। इसके लिए उसके परिजन भी तैयार हो गए थे। उस वक्त एंबुलेंस की सुविधा भी दी गई।

बलरामपुर निवासी अंगनू (तस्वीर में नहीं हैं) अपने बीमार बेटे व पत्नी को ठेले पर लादकर अस्पताल लाए।

हरदोई: पिता की दवा लेने के लिए 160 किलोमीटर साइकिल चलाई
रसूलपुर गांव निवासी राजेश कुमार के पिता स्वामी दायल (60) दिमागी तौर पर अस्वस्थ हैं। 20 साल से उनका बरेली से इलाज चल रहा है। लॉकडाउन के दौरान उनकी दवाएं खत्म हो गईं। बेटा राजेश हरदोई और सीतापुर की मेडिकल शॉप्स के चक्कर काटता रहा। राजेश से कहा गया कि दवाएं सिर्फ बरेली में मिलेंगी। राजेश को जब कोई साधन नहीं मिला तो वह साइकिल से ही 160 किलोमीटर दूर बरेली पहुंचा। पूरा दिन साइकिल चलाकर दवा उसे मिल गई। जब दवा विक्रेता दुर्गेश खटवानी को पता चला कि राजेश इतना लंबा सफर साइकिल से तय करके आया है, तो उन्होंने दवा के आधे पैसे लिए और खाने-पीने की भी व्यवस्था कर दी।

हरदोई निवासी राजेश पिता की दवा लेने के लिए साइकिल से बरेली पहुंचे।

बलरामपुर: सरकारी अस्पताल में पैसे लेकर डिलीवरी करवाई, नवजात ने दम तोड़ा

बलरामपुर जिले के हरिहरगंज बाजार में रहने वाले गौतम सोनी ने पत्नी को प्रसव पीड़ा रहोने पर बुधवार सुबह करीब 9 बजे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। गौतम ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑपरेशन के लिए 10 हजार रुपए मांगे। ऑपरेशन कराने से इनकार कर दिया तो 35 सौ रुपए में नॉर्मल डिलीवरी करवाई। डिलिवरी के बाद नवजात रोया नहीं। प्रसूता को लेबर रूम से बाहर कर दिया गया और बेड भी नहीं दिया गया। गौतम की पत्नी अस्पताल के गेट पर तड़पती रही। नवजात का शरीर भी धीरे-धीरे नीला पड़ने लगा। स्वास्थ्यकर्मियों ने उसका इलाज नहीं किया और बच्चे की मौत हो गई। 
जिला महिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ पीके मिश्रा ने कहा- डिलीवरी के बाद करीब 24 घंटे हम मरीज को अंडर ऑब्जर्वेशन रखते हैं। उसे अस्पताल से बाहर निकालने का कोई मतलब ही नहीं है। अगर किसी ने डिलीवरी के नाम पर पैसे लिए हैं तो उसकी लिखित शिकायत मेरे पास की जाए। दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

बलराम पुर में नवजात की मौत के बाद अस्पताल परिसर में बैठी प्रसूता (बीच में) और उसके परिजन।

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here