सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं ये दालें, भूलकर भी इस समय न करें सेवन

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देश में ज्यादातर घरों का पसंदीदा भोजन दाल चावल माना जाता है। ये हमारी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होता है, लेकिन अगर इसे आप गलत समय पर सेवन करते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है। वहीं, आज हम आपको कुछ दालों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें किस समय पर खाना सेहत के लिए अच्छा रहता है और कब नहीं, आइए विस्तार से जानते हैं…

24 घंटे में कभी भी खा सकते हैं ये दाल 

मूंग और मसूर की मिक्स दाल को कभी भी खा सकते हैं यानी आप 24 घंटे में कभी भी इस दाल का सेवन कर सकते हैं क्योंकि इसे आसानी से पचाया जा सकता है. जहां मूंग की दाल ठंडी तासीर की होती है तो वहीं मसूर की दाल की तासीर गर्म होती है। ऐसे में जब इन दोनों दालों को मिलाकर बनाया जाता है तो इसे किसी भी समय खाया जा सकता है|

रात में खा सकते हैं उड़द की दाल

छिलके वाली उड़द दाल का सेवन आप रात के समय कर सकते हैं। इसकी खासियत है कि आप 12 महीने इस दाल का सेवन कर सकते हैं। रात के समय इस दाल का सेवन करने पर गैस की समस्या नहीं होती है, ना ही पेट दर्द और अपच संबंधित किसी तरह की कोई शिकायत नहीं होती है।

एक-एक दाल का असर

छिलके वाली मूंग की दाल गर्मी और बरसात के मौसम में रात के समय खाई जा सकती है। दरअसल इसकी तासीर ठंडी होती और ये शरीर को ठंडक देने का कार्य करती है। अगर आप सिर्फ मसूर की दाल बनाकर सेवन करना चाहते हैं तो इसे सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही रात के समय बनाकर खाएं। दरअसल इस दाल की तासीर काफी गर्म होती है।

किसी भी सूरत में रात के समय न खाएं ये दाल

छोले, उड़द, साबुत मूंग, साबुत मसूर और राजमा इन सभी दालों को रात में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनका पाचन सही तरह से रात में नहीं होता है। इसके अलावा कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी होने की संभावना हो सकती है। जैसे नींद पूरी न होना, पेट में भारीपन, सुबह पेट ठीक से साफ न होना, गैस बनना, अगले दिन तक ज्यादा आलस आना या पेट दर्द होना।

जगह-जगह का असर

आपको इस बात की जानकारी तो हो ही गई है कि कौन सी दाल किस समय खानी फायदेमंद रहेगी और रात के समय में कौन सी दाल का सेवन करना हानिकारक रहेगा। वहीं, कुछ ऐसी भी दाल होती हैं जिनका सेवन करने से पहले स्थान का ध्यान रखना जरूरी है। जैसा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गर्मी के मौसम में रात में अरहर की दाल खाने का चलन नहीं है, क्योंकि इस दाल को रात के समय पचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वही, अगर बात की जाए पूर्वी उत्तर प्रदेश की तो यहां अरहर की दाल रात में काफी चाव से खाया जाता है। दरअसल, हमारे खान-पान और क्षेत्र की जलवायु का सबसे ज्यादा असर हमारे शरीर पर पड़ता है।

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उम्र का भी है संबंध

आपको बता दें कि छोले, उड़द, साबुत मूंग, राजमा और साबुत मसूर जैसे साबुत अनाज का सेवन अगर 50 वर्ष से कम उम्र के लोग करते हैं तो इससे उन्हें काफी गहरी नींद आ सकती है। वहीं, अगर इन्हीं दालों का सेवन 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग करते हैं तो उन्हें पूरी रात नींद ही नहीं आती है और फिर रातभर जगा रहना पड़ता है।

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