कोविड-19 : युवा निशानेबाज शिवम ठाकुर ने कमाई का 60 प्रतिशत दान किया

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भारतीय निशानेबाज
– फोटो : ट्विटर

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युवा निशानेबाज शिवम ठाकुर शनिवार को बताया कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए उन्होंने अपनी कमाई का 60 प्रतिशत दान किया है। 17 साल के ठाकुर 10 मीटर एयर पिस्टल में प्रतिस्पर्धा करते है। वह इस साल जुलाई में यूएई में होने वाले युवा एशियाई खेलों, सितंबर में होने वाले यूरोपीय युवा खेलों और साल के आखिर में पुर्तगाल में होने वाले विश्व युवा खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

यह निशानेबाज छात्रवृत्ति और वित्त पोषण कार्यक्रमों से साल में लगभग पांच लाख रुपये कमाता है। उन्होंने बताया कि वह स्कूल खेल एवं गतिविधि विकास संस्थान (एसजीएडीएफ) के ब्रांड दूत है। उन्होंने खुद ही खेल के क्षेत्र में बच्चों के सपने को पूरा करने में मदद के लिए इस संस्था की शुरुआत की थी।

उन्होंने कहा कि मैंने महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए एथलीट के तौर मैंने अब तब जो भी अर्जित किया है, उसका 60 प्रतिशत दान देने का फैसला किया है। ठाकुर मध्यम वर्गीय आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता बिहार के सीतामढी से हैं जो नोएडा में एक दुकान चलाते है।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सभी को आगे आना चाहिए और देश को बीमारी को फैलाने से रोकने और जरूरतमंदों की मदद के लिए सबको योगदान करना चाहिए। ठाकुर तेज गेंदबाज बनना चहते थे लेकिन चोट लगने के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़ निशानेबाजी में हाथ आजमाया। भारत में 86,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके है जिसमें से मरने वालों की संख्या 2700 को पार कर गई है।

युवा निशानेबाज शिवम ठाकुर शनिवार को बताया कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए उन्होंने अपनी कमाई का 60 प्रतिशत दान किया है। 17 साल के ठाकुर 10 मीटर एयर पिस्टल में प्रतिस्पर्धा करते है। वह इस साल जुलाई में यूएई में होने वाले युवा एशियाई खेलों, सितंबर में होने वाले यूरोपीय युवा खेलों और साल के आखिर में पुर्तगाल में होने वाले विश्व युवा खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

यह निशानेबाज छात्रवृत्ति और वित्त पोषण कार्यक्रमों से साल में लगभग पांच लाख रुपये कमाता है। उन्होंने बताया कि वह स्कूल खेल एवं गतिविधि विकास संस्थान (एसजीएडीएफ) के ब्रांड दूत है। उन्होंने खुद ही खेल के क्षेत्र में बच्चों के सपने को पूरा करने में मदद के लिए इस संस्था की शुरुआत की थी।

उन्होंने कहा कि मैंने महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए एथलीट के तौर मैंने अब तब जो भी अर्जित किया है, उसका 60 प्रतिशत दान देने का फैसला किया है। ठाकुर मध्यम वर्गीय आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता बिहार के सीतामढी से हैं जो नोएडा में एक दुकान चलाते है।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सभी को आगे आना चाहिए और देश को बीमारी को फैलाने से रोकने और जरूरतमंदों की मदद के लिए सबको योगदान करना चाहिए। ठाकुर तेज गेंदबाज बनना चहते थे लेकिन चोट लगने के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़ निशानेबाजी में हाथ आजमाया। भारत में 86,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके है जिसमें से मरने वालों की संख्या 2700 को पार कर गई है।

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