केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- चीन समेत बाकी देशों से मिलीं खराब एंटीबॉडी टेस्टिंग किट लौटाई जाएंगी, भारत ने इनका पैसा भी रोक रखा है

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  • भारत ने पिछले दिनों कोरोना संक्रमितों के रैपिड टेस्ट के लिए चीन से 5 लाख एंटीबॉडी किट मंगवाई थीं
  • राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने एंटीबॉडी टेस्ट किट के नतीजों पर सवाल उठाए थे
  • इसके बाद आईसीएमआर ने राज्यों में रैपिड एंडीबॉडी टेस्ट किट के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी

दैनिक भास्कर

Apr 24, 2020, 02:26 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना संकट के बीच संक्रमित मरीजों की टेस्टिंग के लिए भारत ने चीन समेत बाकी देशों से रैपिड एंडीबॉडी टेस्टिंग किट मंगवाई थीं। अकेले चीन से ही 5 लाख किट लाई गई थीं। राज्य सरकारों की ओर से इनके खराब रिजल्ट के शिकायत के बाद भारत सरकार ने किट लौटाने का फैसला लिया है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने शुक्रवार को राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कही। उन्होंने कहा कि हम उन देशों को किट के एवज में कोइ रकम नहीं देंगे।

इन किट पर सवाल क्यों उठे?

पिछले दिनों पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार के द्वारा राज्यों की दी गईं टेस्टिंग किट के नतीजों पर सवाल उठाए थे। राजस्थान ने इस किट को कोरोना जांच में फेल पाया और इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इस किट से 1232 लोगों के टेस्ट किए गए थे। सिर्फ दो लोगों के पॉजिटिव होने के संकेत मिले। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया था कि रैपिड टेस्टिंग किट का असर जानने के लिए हमने एक कमेटी बनाई थी। इन किट्स की एक्यूरेसी 90% होनी चाहिए थी, लेकिन यह महज 5.4% ही आ रही है। टेस्टिंग के वक्त तापमान को लेकर जो गाइडलाइन थी, उसका भी पालन किया गया था। इसके बावजूद नतीजे सटीक नहीं हैं। विशेषज्ञों की टीम ने सलाह दी है कि इस टेस्टिंग किट के इस्तेमाल से कोई फायदा नहीं है। ऐसे में रैपिड टेस्टिंग किट से जांच रोक दी गई है।

आईसीएमआर ने क्या कहा था?

राज्यों ने कोरोनावायरस की टेस्टिंग के लिए नियुक्त नोडल एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से इसकी शिकायत की थी। इस पर आईसीएमआर के साइंटिस्ट डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने मंगलवार को कहा था, ‘‘हमें एक राज्य से इस किट के जरिए कम डिटेक्शन होने की शिकायत मिली थी। लिहाजा, हमने तीन और राज्यों से बात की और पाया कि इसकी एक्यूरेसी में काफी फर्क है। कुछ जगहों पर इसकी एक्यूरेसी 6% और कुछ पर 71% है। यह अच्छी बात नहीं है क्योंकि जब इतना फर्क होता है तो हमें जांच करनी होगी। कोरोना महज साढ़े तीन महीने पुरानी बीमारी है। इसकी जांच की तकनीक में सुधार आता रहेगा लेकिन हम इन नतीजों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसलिए सभी राज्यों से गुजारिश है कि टेस्टिंग किट के इस्तेमाल को अगले दो दिन के लिए रोक दें। अगर इन किट के नतीजे गड़बड़ मिले तो हम मैन्यूफैक्चरर्स के सामने भी यह मुद्दा उठाएंगे।’’

रैपिड किट क्या होती है, इसके नतीजे कैसे हैं?

इस टेस्ट के जरिए कोरोना के संदिग्ध मरीजों के खून के नमूनों की जांच की जाती है। ये कोरोना के संदिग्ध मामलों की तेजी से स्क्रीनिंग और उनका पता लगाने के लिए जरूरी है। मरीज के स्वाब की पैथोलॉजी लैब में होने वाली टेस्ट से मिलने वाले नतीजों की तुलना में रैपिड टेस्ट किट से नतीजे हासिल करने में कम समय लगता है। लेकिन रैपिड टेस्ट में एक कमी है। दरअसल, शरीर में अगर कोरोनावायरस है, लेकिन उस पर एंडीबॉडीज ने असर नहीं डाला तो रैपिड टेस्ट नेगेटिव आता है। यानि वायरस की मौजूदगी है, लेकिन पता नहीं चलेगा। ऐसे में उस व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण बाद में उभर सकते हैं और तब तक वह दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है। इससे उलट आरटी-पीसीआर टेस्ट में नतीजे बिल्कुल सटीक आते हैं।

कोरोना की 2 टेस्टिंग तकनीक

आरटी-पीसीआर रैपिड
जांच स्वाब से खून से
जांच कहां लैब में मौके पर
नतीजे 5 से 10 घंटे 15 मिनट में
खर्च 1000 से 4500 रु. 400 से 500 रु.
सटीक ज्यादा कम

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