जेसीबी मशीन से तालाब की सिल्ट सफाई का कार्य श्रमदान घोषित

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हमीरपुर। बाहरी प्रांतों से आए मजदूरों को काम दिलाने के बहाने सुरौलीबुजुर्ग गांव में 6 लाख 86 हजार रुपये से तालाब की सिल्ट सफाई जेसीबी मशीन से कराने का वीडियो वायरल होने पर जांच में प्रधान की पोल खुल गई। जांच में मामला पकड़े जाने पर डीएम ने इस कार्य को श्रमदान घोषित कर संबंधित कर्मियों और प्रधान को कठोर चेतावनी दी है।
मनरेगा से मजदूरों को काम देने के साथ भूगर्भ जल स्तर ऊपर उठाने के लिए तालाब, नालों में गड्ढ़े खुदाई व मेडबंधी जैसे काम जारी है। वहीं कई स्थानों पर संपर्क मार्ग जैसे काम जारी है। लेकिन कुछ ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि व इससे जुड़े कर्मचारी मनमानी कर धन ऐंठने के चक्कर में मजदूरों का हक छीनने पर तुले हैं। ऐसा ही एक मामला ब्लाक सुमेरपुर के सुरौलीबुजुर्ग ग्राम पंचायत में पकड़ा गया है। सीडीओ कमलेश कुमार वैश्य ने बताया कि प्रधान व कर्मचारियों ने मिलकर बेड़ा तालाब खुदाई में मजदूरों को काम न देकर जेसीबी मशीन से खुदाई करा दी। इस मामले का वीडियो वायरल होने पर जांच की तो पाया कि इस वार्षिक योजना में सिल्ट सफाई के लिए शामिल किया गया है। जिसमें मनरेगा से 6.86.511 लाख रुपये खर्च होने हैं। पिछले चार से सात जून के बीच 20 श्रमिकों के मस्टर रोल क्रमांक 897 से 898 तक जारी किए हैं। जिसमें 80 मानव दिवस दर्शाए गए हैं। जिसमें मजदूरी 16 हजार 80 रुपये होती है। तकनीकी सहायक से कराए गए मूल्यांकन में 70 हजार 555 रुपये का कार्य होना पाया गया है। इस प्रकार कार्य स्थल पर 54 हजार 475 रुपये का कार्य अधिक पाया गया है। कहा कि मनरेगा में मशीन का प्रयोग वर्जित है। बताया कि उनकी आख्या पर जिलाधिकारी ने ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने तालाब खुदाई के इस कार्य को श्रमदान घोषित किया है। साथ ही ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम पंचायत सचिव व प्रधान को कठोर चेतावनी दी है।

हमीरपुर। बाहरी प्रांतों से आए मजदूरों को काम दिलाने के बहाने सुरौलीबुजुर्ग गांव में 6 लाख 86 हजार रुपये से तालाब की सिल्ट सफाई जेसीबी मशीन से कराने का वीडियो वायरल होने पर जांच में प्रधान की पोल खुल गई। जांच में मामला पकड़े जाने पर डीएम ने इस कार्य को श्रमदान घोषित कर संबंधित कर्मियों और प्रधान को कठोर चेतावनी दी है।
मनरेगा से मजदूरों को काम देने के साथ भूगर्भ जल स्तर ऊपर उठाने के लिए तालाब, नालों में गड्ढ़े खुदाई व मेडबंधी जैसे काम जारी है। वहीं कई स्थानों पर संपर्क मार्ग जैसे काम जारी है। लेकिन कुछ ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि व इससे जुड़े कर्मचारी मनमानी कर धन ऐंठने के चक्कर में मजदूरों का हक छीनने पर तुले हैं। ऐसा ही एक मामला ब्लाक सुमेरपुर के सुरौलीबुजुर्ग ग्राम पंचायत में पकड़ा गया है। सीडीओ कमलेश कुमार वैश्य ने बताया कि प्रधान व कर्मचारियों ने मिलकर बेड़ा तालाब खुदाई में मजदूरों को काम न देकर जेसीबी मशीन से खुदाई करा दी। इस मामले का वीडियो वायरल होने पर जांच की तो पाया कि इस वार्षिक योजना में सिल्ट सफाई के लिए शामिल किया गया है। जिसमें मनरेगा से 6.86.511 लाख रुपये खर्च होने हैं। पिछले चार से सात जून के बीच 20 श्रमिकों के मस्टर रोल क्रमांक 897 से 898 तक जारी किए हैं। जिसमें 80 मानव दिवस दर्शाए गए हैं। जिसमें मजदूरी 16 हजार 80 रुपये होती है। तकनीकी सहायक से कराए गए मूल्यांकन में 70 हजार 555 रुपये का कार्य होना पाया गया है। इस प्रकार कार्य स्थल पर 54 हजार 475 रुपये का कार्य अधिक पाया गया है। कहा कि मनरेगा में मशीन का प्रयोग वर्जित है। बताया कि उनकी आख्या पर जिलाधिकारी ने ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने तालाब खुदाई के इस कार्य को श्रमदान घोषित किया है। साथ ही ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम पंचायत सचिव व प्रधान को कठोर चेतावनी दी है।

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