प्रिंटिंग प्रेस वालों पर कोरोना की मार, दुकानों पर धरे रह गए शादी समेत विभिन्न समारोह के दो लाख कार्ड

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कोरोना के कहर के चलते शादी, मुंडन, गृहप्रवेश समेत अन्य समारोह के करीब दो लाख से भी अधिक कार्ड जिले की दुकानों और प्रिंटिंग प्रेस में लॉकडाउन हो गए हैं। जून तक जितनी भी शादियों के कार्ड के ऑर्डर थे, या तो कैंसिल हो गए हैं या फिर छपने के बाद लोगों ने कार्ड लेने से मना कर दिया है।

इससे जिले के प्रिंटिंग प्रेस कारोबारियों को 50 लाख से अधिक की नुकसान की आशंका है। जिले में कार्ड छापने वाली छोटी-बड़ी 60 से अधिक प्रिंटिंग प्रेस हैं। इनमें जिले के साथ ही बाहर के लोग भी शादी, सालगिरह, मुंडन और गृह प्रवेश के कार्ड छपवाने आते हैं।

ज्यादातर लोग एक से तीन महीने पहले ही कार्ड छपवाने का ऑर्डर देते हैं। सिविल लाइंस बाजार स्थित न्यू शुभम कार्ड प्रिंटिंग प्रेस के मालिक विपिन अरोड़ा बताते हैं कि लॉकडाउन से प्रेस और दुकानें बंद हैं। शादी, सालगिरह, मुंडन और गृह प्रवेश के ज्यादातर कार्यक्रम कैंसिल हो गए हैं। जो रहे हैं, वह केवल परिवार की मौजूदगी में।

उनके पास खुद 25 हजार से अधिक कार्ड छपे पड़े हैं। लोग इन्हें ले जाने मना कर चुके हैं। इससे करीब चार से पांच लाख रुपये का नुकसान हो गया है। मालवीय चौक स्थित पुंडीर प्रिंटिंग प्रेस के मालिक रियाज पुंडीर बताते हैं कि 14 अप्रैल से हिंदू धर्म में शादियों का सिलसिला शुरू हुआ था।

जबकि, मुस्लिम समाज में शादियां फरवरी, मार्च से हो रही हैं, जो रमजान शुरू होने से पहले तक चला। लॉकडाउन के चलते ज्यादातर शादियां तो हो गईं, लेकिन कार्ड दुकानों पर ही पड़े हैं। आगे भी जो शादियां हैं, उनका भी कार्ड कैंसिल करवाया जा रहा है। जिले में प्रिंटिंग प्रेस मालिकों को 50 लाख का नुकसान हुआ है।

प्रिंटिंग प्रेस व्यवसायियों का कहना है कि 50 हजार से अधिक कार्ड के ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। गोदाम कार्ड और पेपर से भरे पड़े हैं। हर बार जून तक गोदाम खाली हो जाता था और नवंबर के लिए नया माल आता था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार भारी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी।

कार्ड लेने से कर रहे मना

कार्ड छपवाने का ऑर्डर देने वाले लोग अब इन्हें लेने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समारोह स्थगित हो गए तो कार्ड का अब क्या करेंगे? कार्ड व्यवसायी बताते हैं कि ग्राहकों से 30 से 50 प्रतिशत रकम एडवांस में लेकर ही कार्ड छापा जाता है। मसलन, एक ग्राहक अगर 1100 कार्ड का ऑर्डर देता है तो वह एडवांस में केवल 500 रुपये ही देता है।

सार

  • जून तक जितनी भी शादियों के कार्ड छपे थे, कैंसिल हो गए हैं या फिर लेने से किया इनकार
  • 50 लाख के नुकसान की आशंका

विस्तार

कोरोना के कहर के चलते शादी, मुंडन, गृहप्रवेश समेत अन्य समारोह के करीब दो लाख से भी अधिक कार्ड जिले की दुकानों और प्रिंटिंग प्रेस में लॉकडाउन हो गए हैं। जून तक जितनी भी शादियों के कार्ड के ऑर्डर थे, या तो कैंसिल हो गए हैं या फिर छपने के बाद लोगों ने कार्ड लेने से मना कर दिया है।

इससे जिले के प्रिंटिंग प्रेस कारोबारियों को 50 लाख से अधिक की नुकसान की आशंका है। जिले में कार्ड छापने वाली छोटी-बड़ी 60 से अधिक प्रिंटिंग प्रेस हैं। इनमें जिले के साथ ही बाहर के लोग भी शादी, सालगिरह, मुंडन और गृह प्रवेश के कार्ड छपवाने आते हैं।

ज्यादातर लोग एक से तीन महीने पहले ही कार्ड छपवाने का ऑर्डर देते हैं। सिविल लाइंस बाजार स्थित न्यू शुभम कार्ड प्रिंटिंग प्रेस के मालिक विपिन अरोड़ा बताते हैं कि लॉकडाउन से प्रेस और दुकानें बंद हैं। शादी, सालगिरह, मुंडन और गृह प्रवेश के ज्यादातर कार्यक्रम कैंसिल हो गए हैं। जो रहे हैं, वह केवल परिवार की मौजूदगी में।

उनके पास खुद 25 हजार से अधिक कार्ड छपे पड़े हैं। लोग इन्हें ले जाने मना कर चुके हैं। इससे करीब चार से पांच लाख रुपये का नुकसान हो गया है। मालवीय चौक स्थित पुंडीर प्रिंटिंग प्रेस के मालिक रियाज पुंडीर बताते हैं कि 14 अप्रैल से हिंदू धर्म में शादियों का सिलसिला शुरू हुआ था।

50 हजार से अधिक कार्ड कैंसिल

जबकि, मुस्लिम समाज में शादियां फरवरी, मार्च से हो रही हैं, जो रमजान शुरू होने से पहले तक चला। लॉकडाउन के चलते ज्यादातर शादियां तो हो गईं, लेकिन कार्ड दुकानों पर ही पड़े हैं। आगे भी जो शादियां हैं, उनका भी कार्ड कैंसिल करवाया जा रहा है। जिले में प्रिंटिंग प्रेस मालिकों को 50 लाख का नुकसान हुआ है।

प्रिंटिंग प्रेस व्यवसायियों का कहना है कि 50 हजार से अधिक कार्ड के ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। गोदाम कार्ड और पेपर से भरे पड़े हैं। हर बार जून तक गोदाम खाली हो जाता था और नवंबर के लिए नया माल आता था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार भारी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी।

कार्ड लेने से कर रहे मना

कार्ड छपवाने का ऑर्डर देने वाले लोग अब इन्हें लेने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समारोह स्थगित हो गए तो कार्ड का अब क्या करेंगे? कार्ड व्यवसायी बताते हैं कि ग्राहकों से 30 से 50 प्रतिशत रकम एडवांस में लेकर ही कार्ड छापा जाता है। मसलन, एक ग्राहक अगर 1100 कार्ड का ऑर्डर देता है तो वह एडवांस में केवल 500 रुपये ही देता है।

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