टिहरी बांध की झील में आंधी तूफान से बोटों का पहुंचा नुकसान।

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लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण से जहां टिहरी झील में 15 मार्च से पर्यटन गतिविधियां ठप पड़ी हैं, वहीं आंधी तूफान से झील किनारे खड़ी छह बोट झील में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गई हैं और पानी में डूबने से उनके इंजन खराब हो गए है। इससे पहले 14 अप्रैल को भी आधी तूफान से पांच बोट झील में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे बोट संचालकों ने सरकार से बैंक ऋण और लाइसेंस शुल्क माफ करने की मांग की।
इन दिनों 99 बोट संचालक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। आंधी तूफान ने उनकी मुसीबतों को और अधिक बढ़ा दिया है। बृहस्पतिवार शाम 6 बजे आंधी-तूफान से झील किनारे खड़ी अनुज उनियाल, वीरेंद्र नेगी, प्रदीप पंवार, मनीष रावत, दिनेश रावत, नरेंद्र उनियाल की बोट झील में डूब गई थी। काफी मशक्कत के बाद शुक्रवार को भले ही झील में डूबी बोटों को निकाल लिया गया है, लेकिन बोटों के इंजन खराब हो गए हैं।
गंगा-भागीरथी बोट यूनियन के संरक्षक कुलदीप पंवार, अध्यक्ष लखवीर चौहान का कहना है कि बोटों का संचालन बंद होने से उनके पास बैंक ऋण देने के लिए भी धनराशि नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन से नुकसान की भरपाई करने, लाइसेंस शुल्क और बैंक ऋण माफ करने की मांग की। इस बाबत टाडा के एसीईओ/एसडीएम पीआर चौहान ने बताया कि जांच कर रिपोर्ट सीईओ/डीएम को सौंपी जाएगी।

लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण से जहां टिहरी झील में 15 मार्च से पर्यटन गतिविधियां ठप पड़ी हैं, वहीं आंधी तूफान से झील किनारे खड़ी छह बोट झील में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गई हैं और पानी में डूबने से उनके इंजन खराब हो गए है। इससे पहले 14 अप्रैल को भी आधी तूफान से पांच बोट झील में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे बोट संचालकों ने सरकार से बैंक ऋण और लाइसेंस शुल्क माफ करने की मांग की।

इन दिनों 99 बोट संचालक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। आंधी तूफान ने उनकी मुसीबतों को और अधिक बढ़ा दिया है। बृहस्पतिवार शाम 6 बजे आंधी-तूफान से झील किनारे खड़ी अनुज उनियाल, वीरेंद्र नेगी, प्रदीप पंवार, मनीष रावत, दिनेश रावत, नरेंद्र उनियाल की बोट झील में डूब गई थी। काफी मशक्कत के बाद शुक्रवार को भले ही झील में डूबी बोटों को निकाल लिया गया है, लेकिन बोटों के इंजन खराब हो गए हैं।

गंगा-भागीरथी बोट यूनियन के संरक्षक कुलदीप पंवार, अध्यक्ष लखवीर चौहान का कहना है कि बोटों का संचालन बंद होने से उनके पास बैंक ऋण देने के लिए भी धनराशि नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन से नुकसान की भरपाई करने, लाइसेंस शुल्क और बैंक ऋण माफ करने की मांग की। इस बाबत टाडा के एसीईओ/एसडीएम पीआर चौहान ने बताया कि जांच कर रिपोर्ट सीईओ/डीएम को सौंपी जाएगी।

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